700 अंक की फिसलन! बाजार का ब्रेक फेल, निवेशकों के 1 लाख करोड़ साफ

सैफी हुसैन
सैफी हुसैन, ट्रेड एनालिस्ट

शेयर बाजार का मूड इन दिनों किसी थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा हो गया है—कभी तालियां, कभी सन्नाटा। कल तक तेजी की कहानी लिखने वाला बाजार आज अचानक ब्रेक लगा बैठा। सुबह की घंटी बजते ही बिकवाली का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ कि BSE Sensex धड़ाम से 700 अंक नीचे आ गया।

कुछ ही घंटों में BSE पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट कैप से करीब 1 लाख करोड़ रुपये उड़ गए। निवेशकों के चेहरों पर वही भाव था, जो फिल्म के इंटरवल में अचानक प्लॉट ट्विस्ट आने पर होता है।

मुनाफावसूली: जब बड़े खिलाड़ी कैश काउंटर पर पहुंच जाते हैं

बाजार का पहला नियम है जब तेजी बहुत तेज हो जाए तो बड़े खिलाड़ी मुनाफा समेट लेते हैं। कल बाजार 1% से ज्यादा उछला था। जैसे ही आज ट्रेडिंग शुरू हुई, बड़े निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो हल्के करने शुरू कर दिए।

और जब हाथी चल पड़ते हैं तो चींटियों को रास्ता बदलना ही पड़ता है। यही वजह है कि खुदरा निवेशक संभल पाते उससे पहले बाजार नीचे फिसल चुका था।

मिडिल ईस्ट का डर: तेल महंगा तो बाजार ढीला

दूसरी बड़ी वजह है पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी ने वैश्विक बाजारों को बेचैन कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारत पर पड़ता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल महंगा मतलब महंगाई ज्यादा और कंपनियों का मुनाफा कम और यही डर बाजार को बेचैन कर देता है।

विदेशी निवेशकों की चुपचाप विदाई

इस गिरावट के पीछे एक और खामोश कहानी चल रही है विदेशी निवेशकों का धीरे-धीरे बाहर निकलना। FIIs इन दिनों भारतीय बाजार से पैसा निकालकर डॉलर और सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों में जा रहे हैं। जब विदेशी फंड्स बाहर निकलते हैं तो बाजार में लिक्विडिटी कम हो जाती है और गिरावट तेज हो जाती है।

ग्लोबल मार्केट का दबाव

एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू बाजार का मनोबल गिरा दिया। दुनिया के बड़े निवेशक फिलहाल “Wait and Watch” मोड में हैं। यानी फिलहाल बाजार किसी मैराथन में नहीं, बल्कि रस्साकशी में फंसा हुआ है—एक तरफ उम्मीद, दूसरी तरफ डर।

निवेशकों के लिए संकेत: घबराहट नहीं, रणनीति

ऐसे उतार-चढ़ाव वाले समय में घबराकर फैसले लेना सबसे बड़ी गलती होती है। Lump Sum निवेश से बचें। गिरावट में मजबूत कंपनियों को धीरे-धीरे खरीदें। SIP जारी रखें। पोर्टफोलियो का संतुलन बनाए रखें।

याद रखिए, बाजार की हर गिरावट अपने साथ एक नया मौका भी लेकर आती है—बस नजर पहचानने वाली होनी चाहिए।

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